शुक्रवार, 29 अप्रैल 2016

भूगोल (Geography)

भूगोल (Geography)

 विश्व का भूगोल 

भूगोल के लिए प्रयुक्त होने वाला अंग्रेज़ी शब्द 'geography' यूनानी भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है |geo=प्रथ्वी एवं Grapho=वर्णन , जिसका अर्थ 'प्रथ्वी का वर्णन 'है |
'भूगोल का जनक '(Father of Geography)इरैटोस्थनिज को माना जाता है |अतएव इन्हें 'भूगोल का पिता 'है |
हेकेटीयस ने अपनी पुस्तक 'पेरीडायस ' में पहली बार भौगोलिक तत्वों का क्रमबध्द समावेश किया था |
'लेबेनस्त्रोम्म' (एक भौगोलिक क्षेत्र जिसमे जीवो का विकास होता है )की विचारधारा को ferdrik रेटजेल  ने जन्म दिया |
भूगोल को 'मानव पारिस्थितिकी ' बताने वाले सर्वप्रथम विद्वान थे-सं . रा. अमेरिका के हार्लान बैरोज (1922)|
भौगोलिक अध्यन में सर्वप्रथम संकल्पना 'प्रथ्वी तल 'अथवा 'भूतल 'की होती है
वातावरणवाद की विचारधारा के प्रथम (प्रारंभकर्ता थे -हेरोडोटस(यूनान ,485से 425ई.पु.)
विश्व के मानचित्र के सर्वप्रथम निर्माणकर्ता थे -अनेग्जी मेंडर (युनान ,610ई.पु.)
प्रसिद्ध जर्मन भूगोलवेता अलेक्जेंडर वोन हम्बोल्ट को वर्तमान 'भूगोल का पिता ' माना जाता है |वे सर्वप्रथम भूगोलवेता थे ,जिन्होंने संसार के मानचित्र पर समताप रेखाओ को खिंचा था |
प्रथ्वी के आकार का वर्णन करने वाला सबसे उपयुक्त शब्द 'धराकारिय '(Geoid)है |

भारत का इतिहास (HISTORY OF INDIA)4

भारत का इतिहास (HISTORY OF INDIA)

प्राचीन भारत 


  • जिस काल में मनुष्य के द्वारा घटनाओं का कोई लिखित विवरण नहीं प्राप्त होता है उसे प्रागैतिहासिक काल  कहा जाता है |
  • आघ -ऐतिहासिक काल  उस काल को कहा जाता है जिसके लिखित साक्ष्य तो प्राप्त हुए है किन्तु उन्हें अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है जैसे सिंधु घाटी सभ्यता |
  • मानव विकास के उस काल को ऐतिहासिक काल कहा जाता है , जिसका विवरण लिखित रूप में उपलब्ध है |
  •  मानव धरती पर प्लाइस्टोसीन के आरम्भ में पैदा हुआ तथा आधुनिक मानव को हम होमो सेपियन्स या प्रज्ञ मानव के नाम से जानते है |
  •  आग का आविष्कार पुरा-पाषाणकाल में हुआ |
  • चाक (पहिए )का आविष्कार नव-पाषाणकाल में हुआ था |
  •  मनुष्य में स्थायी निवास की प्रव्रती नव-पाषाणकाल में हुई |
  • मनुष्य  ने  सर्वप्रथम तांबा धातु का प्रयोग किया था |
  •  अलेक्जेंडर कनिघम को भारतीय पुरातत्व का पिता कहा जाता है | 
  •  रेडियो कार्बन C14 जैसी नवीन विशलेषण -पद्धति के द्वारा सिन्धु सभ्यता को सर्वमान्य तिथि 2350ई.पू. से 1750ई.पूर्व मानी गयी है इस सभ्यता की खोज 1921ई. में रायबहादुर दयाराम साहनी ने की थी 
  • सिन्धु सभ्यता या सैन्धवं  सभ्यता नगरीय सभ्यता थी |सैन्धवं सभ्यता से प्राप्त परिपक्व अवस्था में वाले स्थलों में केवल  6 को ही नगर की संज्ञा डी गयी है,ये है -मोहनजोदड़ो,हड़प्पा ,लोथल ,कालीबंगा ,एवं चन्हुदड़ो |
  •  सर्वप्रथम हडप्पा नामक स्थल से जानकारी मिलने के कारण इसे हडप्पा सभ्यता नाम दिया गया |
  •  मोहनजोदड़ो से प्राप्त व्रहत स्नानागार एक प्रमुख स्मारक है , जिसके मध्य स्थित स्नानकुंड 11.18 मीटर लम्बा ,7.01मीटर चौड़ा एवं 2.43 मीटर गहरा है |
  • सिंधु सभ्यता की लिपि भाव चित्रात्मक है , जिसे बूस्त्त्रोफेदन के नाम से जाना जाता है |
  • सिन्धु सभ्यता के लोगो ने नगरो तथा घरो के विन्यास के लिए ग्रीड पद्धति अपनायी |
  • मातर -देवी -पूजा , पेड़ -पूजा एव शिव-पूजा के प्रचलन के साक्ष्य भी सिन्धु सभ्यता से मिलते है |

भारत का इतिहास (HISTORY OF INDIA) 3

भारत का इतिहास (HISTORY OF INDIA)

पाषाण काल 


  1. पाषाण काल को तीन भागों में बांटा गया है -पुरापाषाण काल ,मध्य्पाषाण काल ,तथा नवपाषाण काल |
  2. पुरापाषाण काल में मनुष्य की जीविका का मुख्य आधार शिकार था |इस काल को आखेटक तथा खाद्य -संग्राहक जाल भी कहा जाता है |
  3. लगभग 36,000ई.पु. में आधुनिक मानव पहली बार अस्तित्व में आया |आधुनिक मानव को 'होमो सेपियनस ' भी कहा जाता है |
  4. मानव द्वारा प्रथम पालतू पशु कुता था ,जिसे मध्य पाषाण काल में पालतू बनाया गया |
  5. आग की जानकारी मानव को पूरा पाषाण काल से ही  थी ,किन्तु इसका प्रयोग नवपाषण काल से प्रारंभ हुआ |
  6. नव पाषण काल से मानव ने क्रषि कार्य प्रारंभ किया ,जिससे उसमे स्थायी निवास की प्रव्रती विकसित हुई |
  7. भारत में पाषाण कालीन सभ्यता का अनुसंधान सर्वप्रथम रॉबर्ट बुर्स फुट ने 1863ई.में प्रारंभ किया |
  8. भारत में व्य्यस्थित क्रषि का पहला साक्ष्य मेहरगढ़ से प्राप्त हुआ है |
  9. बिहार के चिरांद नामक नवपाषाण कालीन स्थल से हड्डी के औजार मिले है |
  10. पाषण काल के तीनो चरणों का साक्ष्य बेलन घाटी इलाहाबाद से प्राप्त हुए है |
  11. औजारो में प्रयुक्त की जाने वाली पहली धातु तांबा थी तथा इस धातु का ज्ञान मनुष्य को सर्वप्रथम हुआ था |
  12. चावल की खेती का प्राचीनतम साक्ष्य कोलडी हवा (इलाहाबाद )से पाया गया है |
  13. पहिए का आविष्कार नवपाषाण में हुआ  |

भारत का इतिहास (HISTORY OF INDIA)

भारत का इतिहास (HISTORY OF INDIA)

प्राचीन भारत 

 भारतीय इतिहास के स्रोत


  1. भारतीय इतिहास के विषय में जानकारी के चार  प्रमुख स्रोत है -धर्मग्रन्थ ,ऐतिहासिक धर्मग्रन्थ,विदेशियों का विवरण एव पुरातत्व -संबधी साक्ष्य |
  2. चाणक्य द्वारा रचित 'अर्थशास्त्र ' नामक पुस्तक से मोर्येकालीन इतिहास की जानकारी मिलती है |
  3. कल्हण द्वारा रचित 'राजतरगिणी 'को ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित भारत की प्रथम पुस्तक कहा जाता है |इससे कश्मीर के इतिहास की जानकारी मिलती है |
  4. पाणिनी द्वारा रचित संस्कृत भाषा व्याकरण की प्रथम पुस्तक 'अष्टाध्यायी 'से प्राचीन भारतीय इतिहास से संबधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त होती है |
  5. विदेशी लेखकों में मेगस्थनीज ,टॉलमी ,फाहान ,हेन्सोंग ,इतिसंग ,अलबरूनी ,तारानाथ ,मार्कोपोलो ,इत्यादि की पुस्तके प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न कालों का के विवरण की महत्वपूर्ण स्रोत है 
  6. मेगस्थनीज  सेल्युकस निकेटर का राजदूत था , जो चन्द्रगुप्त के राजदरबार में आया था ,इसके द्वारा रचित पुस्तक 'इंडिका ' से मोर्येकालीन समाज एव संस्कृति के संबध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है 
  7. टॉलमी ने 'भारत का भूगोल ' नामक पुस्तक लिखी |
  8. विक्रमादित्य के दरबार में आने वाले चीनी यात्री फाहान द्वारा लिखे गये विवरणों से गुप्तकालीन भारतीय समाज एवं संस्कृति की जानकारी मिलती है |
  9. हर्षवर्धन के शासनकाल में आने वाले चीनी यात्री हेनसाग द्वारा लिखे भ्रमणं व्रतान्त 'सि -यु -की 'से छटी सदी के भारतीय समाज ,धर्म तथा राजनीति के बारे में पता चलता है |     
  10. इत्सिंग नामक चीनी  यात्री सातवीं शताब्दी के  अंत  में भारत आया था ,इसने अपने विवरण में नालंदा विश्वविद्यालय ,विक्रमशिला विश्वविद्यालय तथा    अपने समय के भारत का वर्णन किया है |

भारत का इतिहास (History of india) 2

भारत का इतिहास (History of india)

जैन धर्म 

महावीर स्वामी जैन धर्म  के 24वे  एवं अंतिम तीर्थकंर हुए |
महावीर स्वामी का जन्म 540ई.पु. में कुंडाग्राम (वैशाली )में हुआ था |
इनके पिता सिद्धार्थ 'ज्ञातुक कुल'के सरदार थे और माता त्रिशला लिच्छवी राजा चेटक की बहन थी |
12 वर्षो की कठिन तपस्या के बाद महावीर को जुम्भिक में ऋजुपालिका नदी के तट पर साल व्रक्ष के निचे तपस्या करते हुए सम्पूर्ण ज्ञान का बोध हुआ |
महवीर ने अपना उपदेश प्राक्रत(अर्धगामी ) भाषा में दिया|
जैन धर्म के त्रिरत्न है -सम्यक दर्शन ,सम्यक ज्ञान ,सम्यक आचरण |
महावीर स्वामी की म्रत्यु 72 वर्ष की आयु में 527ई,पु,हुई थी |
तीर्थकंर व उनके प्रतीक
ऋषभदेव - सांड
अजित - हाथी
सम्भव - घोडा
नेमि - शंख
पार्श्वनाथ - सर्प
महावीर - सिंह   

बुधवार, 20 अप्रैल 2016

love story प्रेम कथा २

मूमल से वापस आकर मिलने का वायदा कर महिन्द्रा अमरकोट के लिए रवाना तो हो गया पर पूरे रास्ते उसे मूमल के अलावा कुछ और दिखाई ही नहीं दे रहा था वह तो सिर्फ यही गुनगुनाता चला जा रहा था -
म्हारी माढेची ए मूमल , हाले नी अमराणे देस |
" मेरी मांढ देश की मूमल, आओ मेरे साथ अमरकोट चलो |"

महेन्द्रा अमरकोट पहुँच वहां उसका दिन तो किसी तरह कट जाता पर शाम होते ही उसे मूमल ही मूमल नजर आने लगती वह जितना अपने मन को समझाने की कोशिश करता उतनी ही मूमल की यादें और बढ़ जाती | वह तो यही सोचता कि कैसे लोद्र्वे पहुँच कर मूमल से मिला जाय | आखिर उसे सुझा कि अपने ऊँटो के टोले में एसा ऊंट खोजा जाय जो रातों रात लोद्र्वे जाकर सुबह होते ही वापस अमरकोट आ सके |
उसने अपने रायका रामू (ऊंट चराने वाले) को बुलाकर पूछा तो रामू रायका ने बताया कि उसके टोले में एक चीतल नाम का ऊंट है जो बहुत तेज दौड़ता है और वह उसे आसानी से रात को लोद्र्वे ले जाकर वापस सुबह होने से पहले ला सकता है | फिर क्या था रामू रायका रोज शाम को चीतल ऊंट को सजाकर महेन्द्रा के पास ले आता और महेन्द्रा चीतल पर सवार हो एड लगा लोद्र्वा मूमल के पास जा पहुँचता | तीसरे प्रहार महेन्द्रा फिर चीतल पर चढ़ता और सुबह होने से पहले अमरकोट आ पहुँचता |
महेन्द्रा विवाहित था उसके सात पत्नियाँ थी | मूमल के पास से वापस आने पर वह सबसे छोटी पत्नी के पास आकर सो जाता इस तरह कोई सात आठ महीनों तक उसकी यही दिनचर्या चलती रही इन महीनों में वह बाकी पत्नियों से तो मिला तक नहीं इसलिए वे सभी सबसे छोटी बहु से ईर्ष्या करनी लगी और एक दिन जाकर इस बात पर उन्होंने अपनी सास से जाकर शिकायत की | सास ने छोटी बहु को समझाया कि बाकी पत्नियों को भी महिंद्रा ब्याह कर लाया है उनका भी उस पर हक़ बनता है इसलिए महिंद्रा को उनके पास जाने से मत रोका कर | तब महिंद्रा की छोटी पत्नी ने अपनी सास को बताया कि महिंद्रा तो उसके पास रोज सुबह होने से पहले आता है और आते ही सो जाता है उसे भी उससे बात किये कोई सात आठ महीने हो गए | वह कब कहाँ जाते है,कैसे जाते है,क्यों जाते है मुझे कुछ भी मालूम नहीं |
छोटी बहु की बाते सुन महिंद्रा की माँ को शक हुवा और उसने यह बात अपनी पति राणा वीसलदे को बताई | चतुर वीसलदे ने छोटी बहु से पूछा कि जब महिंद्रा आता है तो उसमे क्या कुछ ख़ास नजर आता है | छोटी बहु ने बताया कि जब रात के आखिरी प्रहर महिंद्रा आता है तो उसके बाल गीले होते है जिनमे से पानी टपक रहा होता है |
चतुर वीसलदे ने बहु को हिदायत दी कि आज उसके बालों के नीचे कटोरा रख उसके भीगे बालों से टपके पानी को इक्कठा कर मेरे पास लाना | बहु ने यही किया और कटोरे में एकत्र पानी वीसलदे के सामने हाजिर किया | वीसलदे ने पानी चख कर कहा- " यह तो काक नदी का पानी है इसका मतलब महिंद्रा जरुर मूमल की मेंड़ी में उसके पास जाता होगा |
महिंद्रा की सातों पत्नियों को तो मूमल का नाम सुनकर जैसे आग लग गयी | उन्होंने आपस में सलाह कर ये पता लगाया कि महेन्द्रा वहां जाता कैसे है | जब उन्हें पता चला कि महेन्द्रा चीतल नाम के ऊंट पर सवार हो मूमल के पास जाता है तो दुसरे दिन उन्होंने चीतल ऊंट के पैर तुड़वा दिए ताकि उसके बिना महिंद्रा मूमल के पास ना जाने पाए |
रात होते ही जब रामू राइका चीतल लेकर नहीं आया तो महिंद्रा उसके घर गया वहां उसे पता चला कि चीतल के तो उसकी पत्नियों ने पैर तुड़वा दिए है तब उसने रामू से चीतल जैसा दूसरा ऊंट माँगा |
रामू ने कहा -" उसके टोले में एक तेज दौड़ने वाली एक टोरडी (छोटी ऊंटनी) है तो सही पर कम उम्र होने के चलते वह चीतल जैसी सुलझी हुई व अनुभवी नहीं है | आप उसे ले जाये पर ध्यान रहे उसके आगे चाबुक ऊँचा ना करे,चाबुक ऊँचा करते ही वह चमक जाती है और जिधर उसका मुंह होता उधर ही दौड़ना शुरू कर देती है तब उसे रोकना बहुत मुश्किल है |
महिंद्रा टोरडी पर सवार हो लोद्र्वा के लिए रवाना होने लगा पर मूमल से मिलने की बैचेनी के चलते वह भूल गया कि चाबुक ऊँचा नहीं करना है और चाबुक ऊँचा करते ही टोरडी ने एड लगायी और सरपट भागने लगी अँधेरी रात में महिंद्रा को रास्ता भी नहीं पता चला कि वह कहाँ पहुँच गया थोड़ी देर में महिंद्रा को एक झोंपड़े में दिया जलता नजर आया वहां जाकर उसने उस क्षेत्र के बारे में पूछा तो पता चला कि वह लोद्र्वा की जगह बाढ़मेर पहुँच चूका है | रास्ता पूछ जब महिंद्रा लोद्र्वा पहुंचा तब तक रात का तीसरा प्रहर बीत चूका था | मूमल उसका इंतजार कर सो चुकी थी उसकी मेंड़ी में दिया जल रहा था | उस दिन मूमल की बहन सुमल भी मेंड़ी में आई थी दोनों की बाते करते करते आँख लग गयी थी | सहेलियों के साथ दोनों बहनों ने देर रात तक खेल खेले थे सुमल ने खेल में पुरुषों के कपडे पहन पुरुष का अभिनय किया था | और वह बातें करती करती पुरुष के कपड़ों में ही मूमल के पलंग पर उसके साथ सो गयी |
महिंद्रा मूमल की मेंड़ी पहुंचा सीढियाँ चढ़ जैसे ही मूमल के कक्ष में घुसा और देखा कि मूमल तो किसी पुरुष के साथ सो रही है | यह दृश्य देखते ही महिंद्रा को तो लगा जैसे उसे एक साथ हजारों बिच्छुओं ने काट खाया हो | उसके हाथ में पकड़ा चाबुक वही गिर पड़ा और वह जिन पैरों से आया था उन्ही से चुपचाप बिना किसी को कुछ कहे वापस अमरकोट लौट आया | वह मन ही मन सोचता रहा कि जिस मूमल के लिए मैं प्राण तक न्योछावर करने के लिए तैयार था वह मूमल ऐसी निकली | जिसके लिए मैं कोसों दूर से आया हूँ वह पर पुरुष के साथ सोयी मिलेगी | धिक्कार है ऐसी औरत पर |
सुबह आँख खुलते ही मूमल की नजर जैसे महिंद्रा के हाथ से छूटे चाबुक पर पड़ी वह समझ गयी कि महेन्द्रा आया था पर शायद किसी बात से नाराज होकर चला गया |उसके दिमाग में कई कल्पनाएँ आती रही |
कई दिनों तक मूमल महिंद्रा का इंतजार करती रही कि वो आएगा और जब आएगा तो सारी गलतफहमियां दूर हो जाएँगी | पर महिंद्रा नहीं आया | मूमल उसके वियोग में फीकी पड़ गई उसने श्रंगार करना छोड़ दिया |खना पीना भी छोड़ दिया उसकी कंचन जैसी काया काली पड़ने लगी | उसने महिंद्रा को कई चिट्ठियां लिखी पर महिंद्रा की पत्नियों ने वह चिट्ठियां महिंद्रा तक पहुँचने ही नहीं दी | आखिर मूमल ने एक ढोली (गायक) को बुला महेन्द्रा के पास भेजा | पर उसे भी महिंद्रा से नहीं मिलने दिया गया | पर वह किसी तरह महेन्द्रा के महल के पास पहुँचने में कामयाब हो गया और रात पड़ते ही उस ढोली ने मांढ राग में गाना शुरू किया -
" तुम्हारे बिना,सोढा राण, यह धरती धुंधली
तेरी मूमल राणी है उदास
मूमल के बुलावे पर
असल प्रियतम महेन्द्रा अब तो घर आव |"

ढोली के द्वारा गयी मांढ सुनकर भी महिंद्रा का दिल नहीं पसीजा और उसने ढोली को कहला भेजा कि -" मूमल से कह देना न तो मैं रूप का लोभी हूँ और न ही वासना का कीड़ा | मैंने अपनी आँखों से उस रात उसका चरित्र देख लिया है जिसके साथ उसकी घनिष्ठता है उसी के साथ रहे | मेरा अब उससे कोई सम्बन्ध नहीं |"
ढोली द्वारा सारी बात सुनकर मूमल के पैरों तले की जमीन ही खिसक गई अब उसे समझ आया कि महेन्द्रा क्यों नहीं आया | मूमल ने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे एसा कलंक लगेगा |
उसने तुरंत अमरकोट जाने के लिए रथ तैयार करवाया ताकि अमरकोट जाकर महिंद्रा से मिल उसका बहम दूर किया जा सके कि वह कलंकिनी नहीं है और उसके सिवाय उसका कोई नहीं |
अमरकोट में मूमल के आने व मिलने का आग्रह पाकर महिंद्रा महिंद्रा ने सोचा,शायद मूमल पवित्र है ,लगता है मुझे ही कोई ग़लतफ़हमी हो गई | और उसने मूमल को सन्देश भिजवाया कि वह उससे सुबह मिलने आएगा | मूमल को इस सन्देश से आशा बंधी |
रात को महेन्द्रा ने सोचा कि -देखें,मूमल मुझसे कितना प्यार करती है ?"'
सो सुबह उसने अपने नौकर के सिखाकर मूमल के डेरे पर भेजा | नौकर रोता-पीटता मूमल के डेरे पर पहुंचा और कहने लगा कि -"महिंद्रा जी को रात में काले नाग ने डस लिया जिससे उनकी मृत्यु हो गयी |
नौकर के मुंह से इतना सुनते ही मूमल पछाड़ खाकर धरती पर गिर पड़ी और पड़ते ही महिंद्रा के वियोग में उसके प्राण पखेरू उड़ गए |
महेन्द्रा को जब मूमल की मृत्यु का समाचार मिला तो वह सुनकर उसी वक्त पागल हो गया और सारी उम्र " हाय म्हारी प्यारी मूमल,म्हारी प्यारी मूमल" कहता फिरता रहा | 

love story प्रेम कथा 1

गुजरात का हमीर जाडेजा अपनी ससुराल अमरकोट (सिंध) आया हुआ था | उसका विवाह अमरकोट के राणा वीसलदे सोढा की पुत्री से हुआ था | राणा वीसलदे का पुत्र महिंद्रा व हमीर हमउम्र थे इसलिए दोनों में खूब जमती थी साथ खेलते,खाते,पीते,शिकार करते और मौज करते | एक दिन दोनों शिकार करते समय एक हिरण का पीछा करते करते दूर लोद्र्वा राज्य की काक नदी के पास आ पहुंचे उनका शिकार हिरण अपनी जान बचाने काक नदी में कूद गया, दोनों ने यह सोच कि बेचारे हिरण ने जल में जल शरण ली है अब उसे क्या मारना | शिकार छोड़ जैसे दोनों ने इधर उधर नजर दौड़ाई तो नदी के उस पार उन्हें एक सुन्दर बगीचा व उसमे बनी एक दुमंजिली झरोखेदार मेड़ी दिखाई दी | इस सुनसान स्थान मे इतना सुहावना स्थान देख दोनों की तबियत प्रसन्न हो गयी | अपने घोड़े नदी मे उतार दोनों ने नदी पार कर बागीचे मे प्रवेश किया इस वीरानी जगह पर इतना सुन्दर बाग़ देख दोनों आश्चर्यचकित थे कि अपने पडौस मे ऐसा नखलिस्तान ! क्योंकि अभी तक तो दोनों ने ऐसे नखलिस्तानों के बारे मे सौदागरों से ही चर्चाएँ सुनी थी |
उनकी आवाजें सुन मेड़ी मे बैठी मूमल ने झरोखे से निचे झांक कर देखा तो उसे गर्दन पर लटके लम्बे काले बाल,भौंहों तक तनी हुई मूंछे,चौड़ी छाती और मांसल भुजाओं वाले दो खुबसूरत नौजवान अपना पसीना सुखाते दिखाई दिए | मूमल ने तुरंत अपनी दासी को बुलाकर कर कहा- नीचे जा, नौकरों से कह इन सरदारों के घोड़े पकड़े व इनके रहने खाने का इंतजाम करे, दोनों किसी अच्छे राजपूत घर के लगते है शायद रास्ता भूल गए है इनकी अच्छी खातिर करा |
मूमल के आदेश से नौकरों ने दोनों के आराम के लिए व्यवस्था की,उन्हें भोजन कराया | तभी मूमल की एक सहेली ने आकर दोनों का परिचय पूछा | हमीर ने अपना व महिंद्रा का परिचय दिया और पूछा कि तुम किसकी सहेली हो ? ये सुन्दर बाग़ व झरोखेदार मेड़ी किसकी की है ? और हम किस सुलक्षीणी के मेहमान है ?
मूमल की सहेली कहने लगी- "क्या आपने मूमल का नाम नहीं सुना ? उसकी चर्चा नहीं सुनी ? मूमल जो जगप्यारी मूमल के नाम से पुरे माढ़ (जैसलमेर) देश मे प्रख्यात है | जिसके रूप से यह सारा प्रदेश महक रहा है जिसके गुणों का बखान यह काक नदी कल-कल कर गा रही है | यह झरोखेदार मेड़ी और सुन्दर बाग़ उसी मूमल का है जो अपनी सहेलियों के साथ यहाँ अकेली ही रहती है |" कह कर सहेली चली गयी |
तभी भोजन का जूंठा थाल उठाने आया नाई बताने लगा -" सरदारों आप मूमल के बारे मे क्या पूछते हो | उसके रूप और गुणों का तो कोई पार ही नहीं | वह शीशे मे अपना रूप देखती है तो शीशा टूट जाता है | श्रंगार कर बाग़ मे आती है चाँद शरमाकर बादलों मे छिप जाता है | उसकी मेड़ी की दीवारों पर कपूर और कस्तूरी का लेप किया हुआ है,रोज ओख्लियों मे कस्तूरी कुटी जाती है,मन-मन दूध से वह रोज स्नान करती है,शरीर पर चन्दन का लेप कराती है | मूमल तो इस दुनिया से अलग है भगवान् ने वैसी दूसरी नहीं बनाई |"
कहते कहते नाई बताने लगा-" अखन कुँवारी मूमल,पुरुषों से दूर अपने ही राग रंग मे डूबी रहती है | एक से एक खुबसूरत,बहादुर,गुणी,धनवान,जवान,राजा,राजकुमार मूमल से शादी करने आये पर मूमल ने तो उनकी और देखा तक नहीं उसे कोई भी पसंद नहीं आया | मूमल ने प्रण ले रखा है कि वह विवाह उसी से करेगी जो उसका दिल जीत लेगा,नहीं तो पूरी उम्र कुंवारी ही रहेगी |"
कुछ ही देर मे मूमल की सहेली ने आकर कहा कि आप दोनों मे से एक को मूमल ने बुलाया है |
हमीर ने अपने साले महेन्द्रा को जाने के लिए कहा पर महिन्द्रा ने हमीर से कहा- पहले आप |
हमीर को मेड़ी के पास छोड़ सहेली ने कहा -" आप भीतर पधारें ! मूमल आपका इंताजर कर रही है |
हमीर जैसे ही आगे चौक मे पहुंचा तो देखा आगे उसका रास्ता रोके एक शेर बैठा है और दूसरी और देखा तो उसे एक अजगर रास्ते पर बैठा दिखाई दिया | हमीर ने सोचा मूमल कोई डायन है और नखलिस्तान रचकर पुरुषों को अपने जाल मे फंसा मार देती होगी | वह तुरंत उल्टे पाँव वापस हो चौक से निकल आया |
हमीर व महिंद्रा आपसे बात करते तब तक मूमल की सहेली आ गयी और महिंद्रा से कहने लगी आप आईये मूमल आपका इंतजार कर रही है |
महिंद्रा ने अपना अंगरखा पहन हाथ मे भाला ले सहेली के पीछे पीछे चलना शुरू किया | सहेली ने उसे भी हमीर की तरह चौक मे छोड़ दिया,महिंद्रा को भी चौक मे रास्ता रोके शेर बैठा नजर आया उसने तुरंत अपना भाला लिया और शेर पर पूरे वेग से प्रहार कर दिया | शेर जमीन पर लुढ़क गया और उसकी चमड़ी मे भरा भूसा बाहर निकल आया | महिंद्रा यह देख मन ही मन मुस्कराया कि मूमल उसकी परीक्षा ले रही है | तभी उसे आगे अजगर बैठा दिखाई दिया महिंद्रा ने भूसे से भरे उस अजगर के भी अपनी तलवार के प्रहार से टुकड़े टुकड़े कर दिए | अगले चौक मे महिंद्रा को पानी भरा नजर आया,महिंद्रा ने पानी की गहराई नापने हेतु जैसे पानी मे भाला डाला तो ठक की आवाज आई महिंद्रा समझ गया कि जिसे वह पानी समझ रहा है वह कांच का फर्श है |
कांच का फर्श पार कर सीढियाँ चढ़कर महिंद्रा मूमल की मेड़ी मे प्रविष्ट हुआ आगे मूमल खड़ी थी,जिसे देखते ही महिंद्रा ठिठक गया | मूमल ऐसे लग रही थी जैसे काले बादल मे बिजली चमकी हो, एड़ी तक लम्बे काले बाल मानों काली नागिन सिर से जमीन पर लोट रही हों| चम्पे की डाल जैसी कलाइयाँ,बड़ी बड़ी सुन्दर आँखे, ऐसे लग रही थी जैसे मद भरे प्याले हो,तपे हुए कुंदन जैसा बदन का रंग,वक्ष जैसे किसी सांचे मे ढाले गए हों,पेट जैसे पीपल का पत्ता,अंग-अंग जैसे उफन रहा हो |
मूमल का यह रूप देखकर महिंद्रा के मुंह से अनायास ही निकल पड़ा-" न किसी मंदिर मे ऐसी मूर्ति होगी और न किसी राजा के रणवास मे ऐसा रूप होगा |" महिंद्रा तो मूमल को ठगा सा देखता ही रहा | उसकी नजरें मूमल के चेहरे को एकटक देखते जा रही थी दूसरी और मूमल मन में कह रही थी - क्या तेज है इस नौजवान के चेहरे पर और नयन तो नयन क्या खंजर है | दोनों की नजरें आपस में ऐसे गड़ी कि हटने का नाम ही नहीं ले रही थी |
आखिर मूमल ने नजरे नीचे कर महिंद्रा का स्वागत किया दोनों ने खूब बाते की ,बातों ही बातों में दोनों एक दुसरे को कब दिल दे बैठे पता ही न चला और न ही पता चला कि कब रात ख़त्म हो गयी और कब सुबह का सूरज निकल आया |
उधर हमीर को महेन्द्रा के साथ कोई अनहोनी ना हो जाये सोच कर नींद ही नहीं आई | सुबह होते ही उसने नाई के साथ संदेशा भेज महिंद्रा को बुलवाया और चलने को कहा | महिंद्रा का मूमल को छोड़कर वापस चलने का मन तो नहीं था पर मूमल से यह कह- "मैं फिर आवुंगा मूमल, बार बार आकर तुमसे मिलूँगा |"
दोनों वहां से चल दिए हमीर गुजरात अपने वतन रवाना हुआ और महिंद्रा अपने राज्य अमरकोट |

मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

राजस्थान इतिहास कालक्रम RAJSTHAN KALKRAM

राजस्थान इतिहास कालक्रम 


5000 ई.पू.===कालीबंगा सभ्यता
3500 ई.पू.===आहड़ सभ्यता
1000-600 ई.पू===.आर्य सभ्यता
300-600 ई.पू.===जनपद युग
350-600 ई.पू.---गुप्त वंश का हस्तक्षेप
551 ई.----वासुदेव चौहान द्वारा सांभर (सपादलक्ष) में चौहान राज्य की स्थापना
728 ई.---बप्पा रावल द्वारा चित्तौड़ में मेवाड़ राज्य की स्थापना
967 ई.==कछवाहा वंशी धोलाराय द्वारा आमेर राज्य की स्थापना
1018 ई.===महमूद गजनवी द्वारा प्रतिहार राज्य पर चढाई एवं विजय
1031 ई.===दिलवाड़ में आदिनाथ मंदिर का निर्माण विमलशाह ने करवाया
1113 ई.===अजयराज द्वारा अजमर (अजयमेरु) की स्थापना
1137 ई.===कछवाह वंश के दुलहराय ने ढूंढार राज्य की स्थापना
1156 ई.===राव जैसलसिंह द्वारा जैसलमेर की स्थापना
1191 ई.===तराईन का द्वितीय युद्ध - पृथ्वीराज व मुहम्मद गौरी के मध्य, पृथ्वीराज विजयी
1192 ई.===तराईन का तृतीय युद्ध - पृथ्वीराज व मुहम्मद गौरी के मध्य, मुहम्मद गौरी की विजय
1195 ई.===मुहम्मद गौरी द्वारा बयाना पर आक्रमण
1213 ई.====जैत्रसिंह मेवाड़ में गद्दीनसीन
1230 ई.===दिलवाड़ में तेजपाल व वास्तुपाल द्वारा नेमिनाथ मंदिर का निर्माण
1234 ई.===रावत जैत्रसिंह द्वारा इल्तुतमिश पर विजय
1237 ई.===रावत जैत्रसिंह द्वारा सुल्तान बलबन पर विजय
1242 ई.===राजा हाड़ा देशराज द्वारा बूंदी राज्य की स्थापना
1291 ई.===हम्मीर द्वारा जलालुद्दीन का आक्रमण विफल करना
1301 ई.===हमीर द्वारा अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण को विफल करना, षड्यंत्र द्वारा पराजित, रणथम्भौर के किले पर 11 जुलाई को तुर्की अधिकार स्थापित
1302 ई.===रत्नसिंह गुहिलों के सिंहासन पर बैठा
1303 ई.===राणा रतनसिंह अलाउद्दीन खिलजी के हाथों परास्त, चित्तौड़ पर खिलजी का अधिकार, चित्तौड़ का नाम परिवर्तीत कर खिज्राबाद
1308 ई.===कान्हड़देव चौहान खिलजी से परास्त, जालौर पर खिलजी का अधिपत्य
1326  ई.===राणा हमीर द्वारा चित्तौड़ पर पुनः शासन स्थापित

RAJASTHAN G.K.

जानें राजस्थान के खनिज के बारे में 

1. फ्लोराइट खनिज के उत्पादन में राजस्थान का देश में
कौनसा स्थान है।
Ans:- प्रथम
2. राजस्थान में जावर की खान किस जिले में
है ? (RAS-94, 95, 99, RPSC 3rd Gr.- 04 )
Ans:- उदयपुर
3. अलौह खनिज की दृष्टि से राजस्थान
का देश में कौनसा स्थान है।
Ans:- प्रथम
4. लौह खनिज की दृष्टि से राजस्थान का देश
में कौनसा स्थान है।
Ans:- चौथा
5. अभ्रक व तांबा उत्पादन में राजस्थान का कौनसा स्थान
है।
Ans:- दूसरा
6. राजस्थान में ताम्बे के विशाल भंडार है ? (RAS-
93,99, Police-07)
Ans:- खेतड़ी में (झुन्झुनू जिला)
7. राजस्थान में गुलाबी रंग का ग्रेनाइट
कहां पर पाया जाता है।
Ans:- जालौर
8. राजस्थान में फैल्सपार कहां पाया जाता है।
Ans:- अजमेर(ब्यावर) व भीलवाड़ा
9. सुपर जिंक समेल्टर संयत्र (ब्रिटेन के सहयोग से)
कहां पर स्थापित किया गया है।
Ans:- चंदेरिया(चित्तौड़गढ़)
10. राजस्थान में सोना कहां पर पाया जाता है। (RAS
98)
Ans:- बांसवाड़ा व डूंगरपुर
11. हीरा राजस्थान में
कहां पाया जाता है।
Ans:- केसरपुरा (चित्तौड़गढ़)
12. राजस्थान में जेम स्टोन औद्योगिक पार्क किस जिले में
स्थित है।
Ans:- जयपुर
13. जिप्सम राजस्थान में सर्वाधिक कहां पर
पाया जाता है। (E.O.-2008)
Ans:- नागौर ( गोट-मांगलोद) में
14. राजस्थान में चांदी की खान
कहां पर स्थित है।
Ans:- जावर (उदयपुर), रामपुरा-
आंगुचा (भीलवाड़ा)
15. मैंगनीज राजस्थान के किस जिलों में
पाया जाता है। (E.O.-2008)
Ans:- बांसवाड़ा व उदयपुर
16. वरमीक्यूलाइट राजस्थान में कहां पर
पाया जाता है।
Ans:- अजमेर
17. अभ्रक राजस्थान में सर्वाधिक कहां पर
पाया जाता है। (RPSC Tea. 2007)
Ans:- भीलवाड़ा व उदयपुर
18. राजस्थान में वोलस्टोनाइट कहां पाया जाता है।
Ans:- सिरोही व डूंगरपुर
19. यूरेनियम राजस्थान में कहां पर पाया जाता है।
Ans:- उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा व सीकर
20. राजस्थान में मैग्नेसाइट कहां पर उत्पादित
किया जाता है।
Ans:- अजमेर
21. सीसा-जस्ता उत्पादन में राजस्थान का देश
में कौनसा स्थान है। (RAS -03)
Ans:- प्रथम
22. मुल्तानी मिट्टी राजस्थान में
कहां पाई जाती है।
Ans:- बीकानेर व बाड़मेर
23. पाइराइट्स राजस्थान में सर्वाधिक
कहां पाया जाता है।
Ans:- सलादीपुर (सीकर)
24. घीया पत्थर राजस्थान में
कहां पाया जाता है।
Ans:- भीलवाड़ा व उदयपुर
25. वह खनिज
जो मिट्टी की क्षारियता दूर करने
के काम आता है, कौनसा है ? (RPSC 3rd Gr.-
09)
Ans:- जिप्सम
26. राजस्थान में कैल्साइट कहां पाया जाता है।
Ans:- सीकर व उदयपुर
27. राजस्थान में बेराइट्स के विशाल भंडार कहां पाये गए
हैं ?
Ans:- जगतपुर (उदयपुर)
28. खनन क्षेत्रों से प्राप्त आय की दृष्टि से
राजस्थान का देश में कौनसा स्थान है ?
Ans:- पांचवा स्थान
29. हरी अग्नि के नाम से जाना जाता है।
Ans:- पन्ना
30. रॉक फास्फेट के राजस्थान के किन जिलों में
पाया जाता है ? (RAS-89, 99, RPSC 3rd Gr.-
04 )
Ans:- झामर कोटड़ा (उदयपुर) व बिरमानियां (जैसलमेर) और
बांसवाडा

सरकारी जॉब की तैयारी के महत्वपूर्ण सवाल JOB SARKARI

सरकारी जॉब की तैयारी के  महत्वपूर्ण सवाल 

1. हरे कबूतर राजस्थान के किस अभयारण्य में पाए जाते
है ? (RPSC 3rd Gr. Teac. 04)
Ans:- सरिस्का अभयारण्य (अलवर)
2. राजस्थान का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान
कौनसा है?
Ans:- रणथम्भोर
3. किस अभयारण्य को रणथम्भोर के बाघों का 'जच्चा घर'
कहा जाता है ?
Ans:- रामगढ विषधारी अभयारण्य
4. उड़न गिलहरी और चौसिंघा (four
Horned Antelope) हिरण के कारण प्रसिद्ध
वन्यजीव अभयारण्य कौनसा है?
Ans:- सीतामाता अभयारण्य प्रतापगढ़
5. किस राष्ट्रीय उद्यान
को यूनेस्को की विश्व प्राकृतिक धरोहर
स्थल के नाम से जाना जाता है ? (RAS-92, 93)
Ans:- केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान
6. राजस्थान के किस वन्यजीव अभयारण्य में
"सींग वाला भारतीय उल्लू"
पाया जाता है?
Ans:- सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान
7. राजस्थान के किस राष्ट्रीय उद्यान में
बहुतायत में जीवाश्म पाए गए हैं जिनमें से
डायनासौर के अस्तित्व को व्यक्त करते
भी चिह्न हैं?
Ans:- राष्ट्रीय मरू उद्यान में
8. किस अभयारण्य को साँपो की शरण
स्थली कहा जाता है ?
Ans:- शेरगढ़ अभयारण्य को
9. कोटा से लगभग 50 किमी दूर
कौनसा अभ्यारण्य है जो घड़ियालों और पतले मुंह वाले
मगरमच्छों के लिए अत्यंत लोकप्रिय है?
Ans:- राष्ट्रीय चम्बल वन्य
जीव अभ्यारण्य (दर्रा वन्य जीव
अभयारण्य)
10. राज्य का सबसे बड़ा चिड़ियाघर कौनसा है ?
Ans:- जयपुर चिड़ियाघर सवाई राम सिंह द्वारा 1876 में
निर्मित
11. राजस्थान के कौनसे दो अभयारण्य बाघ परियोजना में
शामिल है ? (B.Ed.07)
Ans:- रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान और
सरिस्का वन्य जीव अभयारण
12. कृष्ण मृग कहाँ पाए जाते है ? ( Raj Pol.
2007)
Ans:- ताल छापर अभयारण्य, चुरु
13. राजस्थान में कुल कितने राष्ट्रीय उद्यान
है ? (Raj Police)
Ans:- तीन (रणथंभौर, केवलादेव और
मुकंदरा हिल्स नेशनल पार्क)
14. क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे
छोटी बाघ परियोजना कौनसी है ?
Ans:- रणथम्भौर बाघ परियोजना
15. रेत का तीतर के नाम से
कौनसा पक्षी प्रसिद्ध है, व यह किस
अभयारण्य में पाया जाता है ? (Raj Pol. 92)
Ans:- बटबड पक्षी , गजनेर अभयारण्य
16. राजस्थान के किस जिले में सज्जनगढ़ अभयारण्य
स्थित है?
Ans:- उदयपुर
17. राजस्थान के किस वन्य जीव अभ्यारण्य
में जोगी महल स्थित है?
Ans:- रणथम्भोर
18. सागवान वनों का एकमात्र अभयारण्य कौनसा है ?
Ans:- सीतामाता अभयारण्य
19. किस जिले में 'नेशनल वुड फोसिल्स पार्क' स्थित
है ? (RAS-96, 2000)
Ans:- जैसलमेर
20. राजस्थान का कौनसा अभयारण्य राज्य
पक्षी गोडावन के संरक्षण के लिए
जाना जाता है।
Ans:- राष्ट्रीय मरू उद्यान, जैसलमेर