शनिवार, 30 अप्रैल 2016

अजब कानुन की गजब जानकारी AJAB GAJB

अजब कानुन की गजब जानकारी 

1. अर्केंसस की राजधानी लिटिल रॉक में शाम छह बजे के बाद कुत्ते भौंक नहीं सकते। अगर कुत्ते भौंके तो मालिक को जेल हो सकती है।

2. वाशिंगटन के बेलिंगघम में किसी महिला द्वारा नाचते समय तीन कदम पीछे लेना गैर कानूनी है।

3. इटली के कैपरी में शोर करने वाले जूते और चप्पल बैन हैं।

4. सिंगापुर में Chewing gum चबाना बैन है।

5. क्या आपको पता है कि उथाह में हर किसी को कजिन से शादी कर लेने की आजादी है लेकिन 65 साल की उम्र के बाद। माना जाता है कि उस उम्र में आपका फैसला गलत तो नहीं होगा।

6. क्या आपको पता है कि अगर स्पेन में स्लिपर पहन कार वाहन चलाते हैं तो इसके लिए आपको गिरफ्तार भी किया जा सकता है।

7. सन फ्रांसिस्को में सड़क किनारे घोड़े के खाद का 6 फीट ऊंचा ढेर लगाना गैरकानूनी है।

8. टेक्सास के देवोन में अर्धनग्न होकर फर्नीचर बनाना कानून के खिलाफ है।

9. Birmingham, Alabama के चर्च में रात को कोई “सेक्स” नहीं कर सकता।

10. वेस्ट वर्जीनिया में ट्रेन में सफर के दौरान झपकी लेना गैरकानूनी है।

11. मिशिगन में कोई भी व्यक्ति बच्चों और महिलाओं के सामने शपथ नहीं ले सकता है।

12. Bolivia में शादी शुदा औरतों को एक ग्लास से ज़्यादा वाइन पीने की इजाज़त नहीं दी जाती।

13. मिस्र में एक अजीबों-गरीब कानून है। इस कानून के मुताबिक अगर कोई पति अपने पत्नी को किसी गैर मर्द के साथ देखता है और गुस्से में आकर उसकी हत्या कर देता है तो उस हत्या को उतना बड़ा अपराध नहीं माना जाता।

14. कोलंबिया में दुल्हन की माँ के सामने “सुहागरात” मनाई जाती है।

15. माल्टा और लेबनान जैसे देशों में महिलाओं के खिलाफ अजीबों-गरीब कानून है। इस कानून के मुताबिक अगर लड़की को अगवा करने उससे शादी कर लेता है तो उसका अपराध खारिज हो जाता है। हलांकि कि इस तरह की शादी में शर्त ये होती है कि 5 साल से पहले तलाक नहीं ली जा सकती है।

16. कंसास में नंगे हाथों किसी मछली को पकड़ना मना है।

17. दक्षिण कैरोलीना में रविवार के दिन अदालत भवन के बाहर महिलाओं को मारना गैरकानूनी नहीं है।

18. फ्लोरिडा में गुरुवार के दिन 6 बजे के बाद सार्वजनिक जगहों पर पादना गैरकानूनी है।

19. वाशिंगटन में रविवार को रजाई गद्दे नहीं खरीदे जा सकते हैं।

20. अमेरिकी प्रांत मिसूरी में लोगों को शेविंग करने से पहले परमिट लेना जरुरी है।

21. लॉस एंजिल्स में अगर वेटर कस्टमर से कहता है कि “मैं एक एक्टर हूं”, तो ये गैरकानूनी है।

22. पुर्तगाल में समुद्र में पिशाब करना गैरकानूनी कृत्य है।

23. लोआ में चुंबने लेने के पांच मिनट बाद आप कानून तोड़ने की श्रेणी में आते हैं।

24. कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां महिलाएं किसी खेल प्रतियोगिता में शामिल नहीं हो सकतीं। खासकर तैराकी की तो सख्‍त मनाही है।

25. सन सल्वाडोर में नशे में धुत होकर गाड़ी चलाने वाले शख्स को आग से झुलसाकर मारने का प्रावधान है।

26. नॉर्थ कैरोलीना मरे लोगों के सामने कसम लेना गैरकानूनी कृत्य है।

27. थाईलैंड में बगैर “अंडरवियर” पहने घर से बाहर निकलना गैरकानूनी कृत्य है।

28. जर्मनी के राजमार्ग पर गाड़ी रोकना गैरकानूनी है।

29. फ्लोरिडा में रविवार के दिन अविवाहित महिलाओं का पैराशूट पर उड़ना गैरकानूनी है। इसके लिए उन्हें जेल भी हो सकती है।

30. अमेरिकी प्रांत लुइसियाना में शाम ढलने के बाद छिपकली पकड़ना गैरकानूनी है।

31. मियामी में किसी जानवर की नकल करना कानूनन अपराध है।

32. जॉर्जिया के अटलांटा में जिराफ को टेलीफोन या बिजली के खंभे में बांधना कानूनन जुर्म माना जाता है।

33. वर्जिनिया में बिना जूते पहने कार चलाना अपराध माना जाता है।

34. कुछ देशों में महिलाएं फैशन मैगजीन नहीं पढ़ सकती हैं।

35. कई देश तो ऐसे है जहाँ महिला बार्बी डाॅल भी नही खरीद सकती।

36. पेन्सिलवेनिया में पुरुष अपनी पत्नी की लिखित सहमति के बगैर “एल्कोहल” नहीं खरीद सकते हैं।

37. यमन में महिलाओं की गवाही आधी मानी जाती है जब तक उन्हें किसी पुरुष का समर्थन न हो। उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता।

38. वीडियो गेम खेलना यूनान में अपराध है। 2002 में सरकार ने गैम्बलिंग, इलेक्ट्रॉनिक गेमिंग मशीनों पर प्रतिबंध लगा दिया। वहां इंसान द्वारा बनाई गई मनोरंजन की इलेक्ट्रॉनिक चीजें नापसंद की जाती हैं।

39. टेक्सॉस में किसी दूसरे व्यक्ति की गाय का दूध निकालना गैरकानूनी है।

40. अमेरिका के 24 राज्यों में एक कानून के तहत औरत अपने पति को तलाक दे सकती है, अगर वो नामर्द है।

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2016

भूगोल (Geography) 2

भूगोल (Geography)

सूर्य से संबधित विशिष्ट तथ्य 

प्रथ्वी से न्यूनतम दुरी - 14,95,98,900 किमी
प्रथ्वी से अधिकतम दुरी - 15.21 करोड़ किमी
प्रथ्वी से माध्य दुरी - 14.98 करोड़ किमी
सूर्य का व्यास - 13,91,980 किमी
आयतन - प्रथ्वी से 13 लाख गुना
द्रव्यमान - प्रथ्वी से 3,32,000 लाख गुना
तलीय गुरुत्व - प्रथ्वी से 28 गुना
केन्द्रीय घनत्व - 100 ग्राम प्रति धन सेमी
फोटोस्फेयर ताप - 5,760 डिग्री सेल्सियस
केंद्र का ताप - 1,50,00,000 सेल्सियस
सूर्य धब्बों का ताप - 40,000 जुल प्रति सेकेण्ड
ऊर्जा उत्सर्जन - 1026 जुल /सेकण्ड
केन्द्रीय दबाव - 100,00,00,000 एटमोस्फेयर
घूर्णन गति - 25.38(भूमध्य रेखा पर )
33 दिन (धुर्वो पर )
रासायनिक संघटन - हाइड्रोजन 71 %,हीलियम 26.5%,अन्य 2.5%
सूर्य से प्रथ्वी तक प्रकाशपहुचने   - 8 मिनट 16.6 सेकेण्ड
 सूर्य के प्रकाश जी चाल - 3*108 मी/सेकंड
सूर्य के प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय की दुरी -9.45*1015 किमी
 

राजस्थान सामान्य ज्ञान (RAJASTHAN G.K.)

राजस्थान सामान्य ज्ञान
(RAJASTHAN G.K.) 

प्रमुख राजस्थानी आभूषण (RAJASTHAN IMPORTANT )

शरीर के अंग                                                                                      आभूषण 
सिर व मस्तक - बोरला.शीशफूल,रखडी,टिकड़ा,फिणी,सांकली,तावित,मेमद,दामनी|
नाक - नथ,लौगं,कांटा,चूनी,चोप,बारी,लुंग |
कान - झुमका,बाली,सुरलिया,कर्णफूल,अगोट्या ,झेला ,जमेला,मुरकी,माकंडी,टोटी |
गला व छाती - हालरो ,हांसली ,चन्द्र्माला,कंठमाला,हाकर,चम्पाकली,कंठी,पंचलड़ी,मटरमाला,मोहनमाला,जालरो ,चन्दनहार,निबोरी,थमडिया,जुगावली,चोकी,कंठसर
बाजू व हाथ - बाजूबंद,फुंदना,अणत ,मौखडी ,चुडा,कड़ा,वटटा,तकमा,पूंचिया,कंगन ,गोखरू,
अंगुली - बिंटी,अंगूठी,छल्ला,दामणा,अरसी,हथपान
कमर - कन्दोरा,करघनी,तगड़ी,कणकती,
पैर - कड़ा,पायजेब,लंगर,नुपुर,झांझर,नेवरी,लच्छा,टोडा,टांका,आंवला
पैर की अंगुली - बिछिया,गोर,फोलरी,लछ्ने
दांत - रखन  

राजस्थान में शासन (Rajasthan me shasan)

राजस्थान में शासन (Rajasthan me shasan)

राजस्थान महत्वपूर्ण प्रशासनिक तथ्य (rajasthan important sarkari tthay)

संभाग ===7
जिले ===33
उपखड ===244
जिलापरिषद ===33
नगर निकाय (दिसंबर ,09 के अंत में )===182
तहसील ===275
नगर (2011 के )===297
पंचायत समितिया (दिसंबर ,2009 के अनुसार)===249
ग्राम पंचायत (31 मार्च 2010 )===9177
कुल गांव (2011 ke )===39753
विधानसभा सदस्य ===200
लोकसभा सदस्य ===25
सबसे बड़ा व सबसे छोटा संभाग क्रमशः (क्षेत्रफल )===जोधपुर ,भरतपुर
सर्वाधिक तहसीलों वाला जिला ===जयपुर (13 )
सर्वाधिक गांवो वाला जिला ===श्री गंगानगर (3014)
सबसे कम गांव वाला जिला ===सिरोही (462 )
राज्यसभा सदस्य ===10 

भूगोल (Geography)

भूगोल (Geography)

 विश्व का भूगोल 

भूगोल के लिए प्रयुक्त होने वाला अंग्रेज़ी शब्द 'geography' यूनानी भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है |geo=प्रथ्वी एवं Grapho=वर्णन , जिसका अर्थ 'प्रथ्वी का वर्णन 'है |
'भूगोल का जनक '(Father of Geography)इरैटोस्थनिज को माना जाता है |अतएव इन्हें 'भूगोल का पिता 'है |
हेकेटीयस ने अपनी पुस्तक 'पेरीडायस ' में पहली बार भौगोलिक तत्वों का क्रमबध्द समावेश किया था |
'लेबेनस्त्रोम्म' (एक भौगोलिक क्षेत्र जिसमे जीवो का विकास होता है )की विचारधारा को ferdrik रेटजेल  ने जन्म दिया |
भूगोल को 'मानव पारिस्थितिकी ' बताने वाले सर्वप्रथम विद्वान थे-सं . रा. अमेरिका के हार्लान बैरोज (1922)|
भौगोलिक अध्यन में सर्वप्रथम संकल्पना 'प्रथ्वी तल 'अथवा 'भूतल 'की होती है
वातावरणवाद की विचारधारा के प्रथम (प्रारंभकर्ता थे -हेरोडोटस(यूनान ,485से 425ई.पु.)
विश्व के मानचित्र के सर्वप्रथम निर्माणकर्ता थे -अनेग्जी मेंडर (युनान ,610ई.पु.)
प्रसिद्ध जर्मन भूगोलवेता अलेक्जेंडर वोन हम्बोल्ट को वर्तमान 'भूगोल का पिता ' माना जाता है |वे सर्वप्रथम भूगोलवेता थे ,जिन्होंने संसार के मानचित्र पर समताप रेखाओ को खिंचा था |
प्रथ्वी के आकार का वर्णन करने वाला सबसे उपयुक्त शब्द 'धराकारिय '(Geoid)है |

भारत का इतिहास (HISTORY OF INDIA)4

भारत का इतिहास (HISTORY OF INDIA)

प्राचीन भारत 


  • जिस काल में मनुष्य के द्वारा घटनाओं का कोई लिखित विवरण नहीं प्राप्त होता है उसे प्रागैतिहासिक काल  कहा जाता है |
  • आघ -ऐतिहासिक काल  उस काल को कहा जाता है जिसके लिखित साक्ष्य तो प्राप्त हुए है किन्तु उन्हें अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है जैसे सिंधु घाटी सभ्यता |
  • मानव विकास के उस काल को ऐतिहासिक काल कहा जाता है , जिसका विवरण लिखित रूप में उपलब्ध है |
  •  मानव धरती पर प्लाइस्टोसीन के आरम्भ में पैदा हुआ तथा आधुनिक मानव को हम होमो सेपियन्स या प्रज्ञ मानव के नाम से जानते है |
  •  आग का आविष्कार पुरा-पाषाणकाल में हुआ |
  • चाक (पहिए )का आविष्कार नव-पाषाणकाल में हुआ था |
  •  मनुष्य में स्थायी निवास की प्रव्रती नव-पाषाणकाल में हुई |
  • मनुष्य  ने  सर्वप्रथम तांबा धातु का प्रयोग किया था |
  •  अलेक्जेंडर कनिघम को भारतीय पुरातत्व का पिता कहा जाता है | 
  •  रेडियो कार्बन C14 जैसी नवीन विशलेषण -पद्धति के द्वारा सिन्धु सभ्यता को सर्वमान्य तिथि 2350ई.पू. से 1750ई.पूर्व मानी गयी है इस सभ्यता की खोज 1921ई. में रायबहादुर दयाराम साहनी ने की थी 
  • सिन्धु सभ्यता या सैन्धवं  सभ्यता नगरीय सभ्यता थी |सैन्धवं सभ्यता से प्राप्त परिपक्व अवस्था में वाले स्थलों में केवल  6 को ही नगर की संज्ञा डी गयी है,ये है -मोहनजोदड़ो,हड़प्पा ,लोथल ,कालीबंगा ,एवं चन्हुदड़ो |
  •  सर्वप्रथम हडप्पा नामक स्थल से जानकारी मिलने के कारण इसे हडप्पा सभ्यता नाम दिया गया |
  •  मोहनजोदड़ो से प्राप्त व्रहत स्नानागार एक प्रमुख स्मारक है , जिसके मध्य स्थित स्नानकुंड 11.18 मीटर लम्बा ,7.01मीटर चौड़ा एवं 2.43 मीटर गहरा है |
  • सिंधु सभ्यता की लिपि भाव चित्रात्मक है , जिसे बूस्त्त्रोफेदन के नाम से जाना जाता है |
  • सिन्धु सभ्यता के लोगो ने नगरो तथा घरो के विन्यास के लिए ग्रीड पद्धति अपनायी |
  • मातर -देवी -पूजा , पेड़ -पूजा एव शिव-पूजा के प्रचलन के साक्ष्य भी सिन्धु सभ्यता से मिलते है |

भारत का इतिहास (HISTORY OF INDIA) 3

भारत का इतिहास (HISTORY OF INDIA)

पाषाण काल 


  1. पाषाण काल को तीन भागों में बांटा गया है -पुरापाषाण काल ,मध्य्पाषाण काल ,तथा नवपाषाण काल |
  2. पुरापाषाण काल में मनुष्य की जीविका का मुख्य आधार शिकार था |इस काल को आखेटक तथा खाद्य -संग्राहक जाल भी कहा जाता है |
  3. लगभग 36,000ई.पु. में आधुनिक मानव पहली बार अस्तित्व में आया |आधुनिक मानव को 'होमो सेपियनस ' भी कहा जाता है |
  4. मानव द्वारा प्रथम पालतू पशु कुता था ,जिसे मध्य पाषाण काल में पालतू बनाया गया |
  5. आग की जानकारी मानव को पूरा पाषाण काल से ही  थी ,किन्तु इसका प्रयोग नवपाषण काल से प्रारंभ हुआ |
  6. नव पाषण काल से मानव ने क्रषि कार्य प्रारंभ किया ,जिससे उसमे स्थायी निवास की प्रव्रती विकसित हुई |
  7. भारत में पाषाण कालीन सभ्यता का अनुसंधान सर्वप्रथम रॉबर्ट बुर्स फुट ने 1863ई.में प्रारंभ किया |
  8. भारत में व्य्यस्थित क्रषि का पहला साक्ष्य मेहरगढ़ से प्राप्त हुआ है |
  9. बिहार के चिरांद नामक नवपाषाण कालीन स्थल से हड्डी के औजार मिले है |
  10. पाषण काल के तीनो चरणों का साक्ष्य बेलन घाटी इलाहाबाद से प्राप्त हुए है |
  11. औजारो में प्रयुक्त की जाने वाली पहली धातु तांबा थी तथा इस धातु का ज्ञान मनुष्य को सर्वप्रथम हुआ था |
  12. चावल की खेती का प्राचीनतम साक्ष्य कोलडी हवा (इलाहाबाद )से पाया गया है |
  13. पहिए का आविष्कार नवपाषाण में हुआ  |

भारत का इतिहास (HISTORY OF INDIA)

भारत का इतिहास (HISTORY OF INDIA)

प्राचीन भारत 

 भारतीय इतिहास के स्रोत


  1. भारतीय इतिहास के विषय में जानकारी के चार  प्रमुख स्रोत है -धर्मग्रन्थ ,ऐतिहासिक धर्मग्रन्थ,विदेशियों का विवरण एव पुरातत्व -संबधी साक्ष्य |
  2. चाणक्य द्वारा रचित 'अर्थशास्त्र ' नामक पुस्तक से मोर्येकालीन इतिहास की जानकारी मिलती है |
  3. कल्हण द्वारा रचित 'राजतरगिणी 'को ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित भारत की प्रथम पुस्तक कहा जाता है |इससे कश्मीर के इतिहास की जानकारी मिलती है |
  4. पाणिनी द्वारा रचित संस्कृत भाषा व्याकरण की प्रथम पुस्तक 'अष्टाध्यायी 'से प्राचीन भारतीय इतिहास से संबधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त होती है |
  5. विदेशी लेखकों में मेगस्थनीज ,टॉलमी ,फाहान ,हेन्सोंग ,इतिसंग ,अलबरूनी ,तारानाथ ,मार्कोपोलो ,इत्यादि की पुस्तके प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न कालों का के विवरण की महत्वपूर्ण स्रोत है 
  6. मेगस्थनीज  सेल्युकस निकेटर का राजदूत था , जो चन्द्रगुप्त के राजदरबार में आया था ,इसके द्वारा रचित पुस्तक 'इंडिका ' से मोर्येकालीन समाज एव संस्कृति के संबध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है 
  7. टॉलमी ने 'भारत का भूगोल ' नामक पुस्तक लिखी |
  8. विक्रमादित्य के दरबार में आने वाले चीनी यात्री फाहान द्वारा लिखे गये विवरणों से गुप्तकालीन भारतीय समाज एवं संस्कृति की जानकारी मिलती है |
  9. हर्षवर्धन के शासनकाल में आने वाले चीनी यात्री हेनसाग द्वारा लिखे भ्रमणं व्रतान्त 'सि -यु -की 'से छटी सदी के भारतीय समाज ,धर्म तथा राजनीति के बारे में पता चलता है |     
  10. इत्सिंग नामक चीनी  यात्री सातवीं शताब्दी के  अंत  में भारत आया था ,इसने अपने विवरण में नालंदा विश्वविद्यालय ,विक्रमशिला विश्वविद्यालय तथा    अपने समय के भारत का वर्णन किया है |

भारत का इतिहास (History of india) 2

भारत का इतिहास (History of india)

जैन धर्म 

महावीर स्वामी जैन धर्म  के 24वे  एवं अंतिम तीर्थकंर हुए |
महावीर स्वामी का जन्म 540ई.पु. में कुंडाग्राम (वैशाली )में हुआ था |
इनके पिता सिद्धार्थ 'ज्ञातुक कुल'के सरदार थे और माता त्रिशला लिच्छवी राजा चेटक की बहन थी |
12 वर्षो की कठिन तपस्या के बाद महावीर को जुम्भिक में ऋजुपालिका नदी के तट पर साल व्रक्ष के निचे तपस्या करते हुए सम्पूर्ण ज्ञान का बोध हुआ |
महवीर ने अपना उपदेश प्राक्रत(अर्धगामी ) भाषा में दिया|
जैन धर्म के त्रिरत्न है -सम्यक दर्शन ,सम्यक ज्ञान ,सम्यक आचरण |
महावीर स्वामी की म्रत्यु 72 वर्ष की आयु में 527ई,पु,हुई थी |
तीर्थकंर व उनके प्रतीक
ऋषभदेव - सांड
अजित - हाथी
सम्भव - घोडा
नेमि - शंख
पार्श्वनाथ - सर्प
महावीर - सिंह   

बुधवार, 20 अप्रैल 2016

love story प्रेम कथा २

मूमल से वापस आकर मिलने का वायदा कर महिन्द्रा अमरकोट के लिए रवाना तो हो गया पर पूरे रास्ते उसे मूमल के अलावा कुछ और दिखाई ही नहीं दे रहा था वह तो सिर्फ यही गुनगुनाता चला जा रहा था -
म्हारी माढेची ए मूमल , हाले नी अमराणे देस |
" मेरी मांढ देश की मूमल, आओ मेरे साथ अमरकोट चलो |"

महेन्द्रा अमरकोट पहुँच वहां उसका दिन तो किसी तरह कट जाता पर शाम होते ही उसे मूमल ही मूमल नजर आने लगती वह जितना अपने मन को समझाने की कोशिश करता उतनी ही मूमल की यादें और बढ़ जाती | वह तो यही सोचता कि कैसे लोद्र्वे पहुँच कर मूमल से मिला जाय | आखिर उसे सुझा कि अपने ऊँटो के टोले में एसा ऊंट खोजा जाय जो रातों रात लोद्र्वे जाकर सुबह होते ही वापस अमरकोट आ सके |
उसने अपने रायका रामू (ऊंट चराने वाले) को बुलाकर पूछा तो रामू रायका ने बताया कि उसके टोले में एक चीतल नाम का ऊंट है जो बहुत तेज दौड़ता है और वह उसे आसानी से रात को लोद्र्वे ले जाकर वापस सुबह होने से पहले ला सकता है | फिर क्या था रामू रायका रोज शाम को चीतल ऊंट को सजाकर महेन्द्रा के पास ले आता और महेन्द्रा चीतल पर सवार हो एड लगा लोद्र्वा मूमल के पास जा पहुँचता | तीसरे प्रहार महेन्द्रा फिर चीतल पर चढ़ता और सुबह होने से पहले अमरकोट आ पहुँचता |
महेन्द्रा विवाहित था उसके सात पत्नियाँ थी | मूमल के पास से वापस आने पर वह सबसे छोटी पत्नी के पास आकर सो जाता इस तरह कोई सात आठ महीनों तक उसकी यही दिनचर्या चलती रही इन महीनों में वह बाकी पत्नियों से तो मिला तक नहीं इसलिए वे सभी सबसे छोटी बहु से ईर्ष्या करनी लगी और एक दिन जाकर इस बात पर उन्होंने अपनी सास से जाकर शिकायत की | सास ने छोटी बहु को समझाया कि बाकी पत्नियों को भी महिंद्रा ब्याह कर लाया है उनका भी उस पर हक़ बनता है इसलिए महिंद्रा को उनके पास जाने से मत रोका कर | तब महिंद्रा की छोटी पत्नी ने अपनी सास को बताया कि महिंद्रा तो उसके पास रोज सुबह होने से पहले आता है और आते ही सो जाता है उसे भी उससे बात किये कोई सात आठ महीने हो गए | वह कब कहाँ जाते है,कैसे जाते है,क्यों जाते है मुझे कुछ भी मालूम नहीं |
छोटी बहु की बाते सुन महिंद्रा की माँ को शक हुवा और उसने यह बात अपनी पति राणा वीसलदे को बताई | चतुर वीसलदे ने छोटी बहु से पूछा कि जब महिंद्रा आता है तो उसमे क्या कुछ ख़ास नजर आता है | छोटी बहु ने बताया कि जब रात के आखिरी प्रहर महिंद्रा आता है तो उसके बाल गीले होते है जिनमे से पानी टपक रहा होता है |
चतुर वीसलदे ने बहु को हिदायत दी कि आज उसके बालों के नीचे कटोरा रख उसके भीगे बालों से टपके पानी को इक्कठा कर मेरे पास लाना | बहु ने यही किया और कटोरे में एकत्र पानी वीसलदे के सामने हाजिर किया | वीसलदे ने पानी चख कर कहा- " यह तो काक नदी का पानी है इसका मतलब महिंद्रा जरुर मूमल की मेंड़ी में उसके पास जाता होगा |
महिंद्रा की सातों पत्नियों को तो मूमल का नाम सुनकर जैसे आग लग गयी | उन्होंने आपस में सलाह कर ये पता लगाया कि महेन्द्रा वहां जाता कैसे है | जब उन्हें पता चला कि महेन्द्रा चीतल नाम के ऊंट पर सवार हो मूमल के पास जाता है तो दुसरे दिन उन्होंने चीतल ऊंट के पैर तुड़वा दिए ताकि उसके बिना महिंद्रा मूमल के पास ना जाने पाए |
रात होते ही जब रामू राइका चीतल लेकर नहीं आया तो महिंद्रा उसके घर गया वहां उसे पता चला कि चीतल के तो उसकी पत्नियों ने पैर तुड़वा दिए है तब उसने रामू से चीतल जैसा दूसरा ऊंट माँगा |
रामू ने कहा -" उसके टोले में एक तेज दौड़ने वाली एक टोरडी (छोटी ऊंटनी) है तो सही पर कम उम्र होने के चलते वह चीतल जैसी सुलझी हुई व अनुभवी नहीं है | आप उसे ले जाये पर ध्यान रहे उसके आगे चाबुक ऊँचा ना करे,चाबुक ऊँचा करते ही वह चमक जाती है और जिधर उसका मुंह होता उधर ही दौड़ना शुरू कर देती है तब उसे रोकना बहुत मुश्किल है |
महिंद्रा टोरडी पर सवार हो लोद्र्वा के लिए रवाना होने लगा पर मूमल से मिलने की बैचेनी के चलते वह भूल गया कि चाबुक ऊँचा नहीं करना है और चाबुक ऊँचा करते ही टोरडी ने एड लगायी और सरपट भागने लगी अँधेरी रात में महिंद्रा को रास्ता भी नहीं पता चला कि वह कहाँ पहुँच गया थोड़ी देर में महिंद्रा को एक झोंपड़े में दिया जलता नजर आया वहां जाकर उसने उस क्षेत्र के बारे में पूछा तो पता चला कि वह लोद्र्वा की जगह बाढ़मेर पहुँच चूका है | रास्ता पूछ जब महिंद्रा लोद्र्वा पहुंचा तब तक रात का तीसरा प्रहर बीत चूका था | मूमल उसका इंतजार कर सो चुकी थी उसकी मेंड़ी में दिया जल रहा था | उस दिन मूमल की बहन सुमल भी मेंड़ी में आई थी दोनों की बाते करते करते आँख लग गयी थी | सहेलियों के साथ दोनों बहनों ने देर रात तक खेल खेले थे सुमल ने खेल में पुरुषों के कपडे पहन पुरुष का अभिनय किया था | और वह बातें करती करती पुरुष के कपड़ों में ही मूमल के पलंग पर उसके साथ सो गयी |
महिंद्रा मूमल की मेंड़ी पहुंचा सीढियाँ चढ़ जैसे ही मूमल के कक्ष में घुसा और देखा कि मूमल तो किसी पुरुष के साथ सो रही है | यह दृश्य देखते ही महिंद्रा को तो लगा जैसे उसे एक साथ हजारों बिच्छुओं ने काट खाया हो | उसके हाथ में पकड़ा चाबुक वही गिर पड़ा और वह जिन पैरों से आया था उन्ही से चुपचाप बिना किसी को कुछ कहे वापस अमरकोट लौट आया | वह मन ही मन सोचता रहा कि जिस मूमल के लिए मैं प्राण तक न्योछावर करने के लिए तैयार था वह मूमल ऐसी निकली | जिसके लिए मैं कोसों दूर से आया हूँ वह पर पुरुष के साथ सोयी मिलेगी | धिक्कार है ऐसी औरत पर |
सुबह आँख खुलते ही मूमल की नजर जैसे महिंद्रा के हाथ से छूटे चाबुक पर पड़ी वह समझ गयी कि महेन्द्रा आया था पर शायद किसी बात से नाराज होकर चला गया |उसके दिमाग में कई कल्पनाएँ आती रही |
कई दिनों तक मूमल महिंद्रा का इंतजार करती रही कि वो आएगा और जब आएगा तो सारी गलतफहमियां दूर हो जाएँगी | पर महिंद्रा नहीं आया | मूमल उसके वियोग में फीकी पड़ गई उसने श्रंगार करना छोड़ दिया |खना पीना भी छोड़ दिया उसकी कंचन जैसी काया काली पड़ने लगी | उसने महिंद्रा को कई चिट्ठियां लिखी पर महिंद्रा की पत्नियों ने वह चिट्ठियां महिंद्रा तक पहुँचने ही नहीं दी | आखिर मूमल ने एक ढोली (गायक) को बुला महेन्द्रा के पास भेजा | पर उसे भी महिंद्रा से नहीं मिलने दिया गया | पर वह किसी तरह महेन्द्रा के महल के पास पहुँचने में कामयाब हो गया और रात पड़ते ही उस ढोली ने मांढ राग में गाना शुरू किया -
" तुम्हारे बिना,सोढा राण, यह धरती धुंधली
तेरी मूमल राणी है उदास
मूमल के बुलावे पर
असल प्रियतम महेन्द्रा अब तो घर आव |"

ढोली के द्वारा गयी मांढ सुनकर भी महिंद्रा का दिल नहीं पसीजा और उसने ढोली को कहला भेजा कि -" मूमल से कह देना न तो मैं रूप का लोभी हूँ और न ही वासना का कीड़ा | मैंने अपनी आँखों से उस रात उसका चरित्र देख लिया है जिसके साथ उसकी घनिष्ठता है उसी के साथ रहे | मेरा अब उससे कोई सम्बन्ध नहीं |"
ढोली द्वारा सारी बात सुनकर मूमल के पैरों तले की जमीन ही खिसक गई अब उसे समझ आया कि महेन्द्रा क्यों नहीं आया | मूमल ने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे एसा कलंक लगेगा |
उसने तुरंत अमरकोट जाने के लिए रथ तैयार करवाया ताकि अमरकोट जाकर महिंद्रा से मिल उसका बहम दूर किया जा सके कि वह कलंकिनी नहीं है और उसके सिवाय उसका कोई नहीं |
अमरकोट में मूमल के आने व मिलने का आग्रह पाकर महिंद्रा महिंद्रा ने सोचा,शायद मूमल पवित्र है ,लगता है मुझे ही कोई ग़लतफ़हमी हो गई | और उसने मूमल को सन्देश भिजवाया कि वह उससे सुबह मिलने आएगा | मूमल को इस सन्देश से आशा बंधी |
रात को महेन्द्रा ने सोचा कि -देखें,मूमल मुझसे कितना प्यार करती है ?"'
सो सुबह उसने अपने नौकर के सिखाकर मूमल के डेरे पर भेजा | नौकर रोता-पीटता मूमल के डेरे पर पहुंचा और कहने लगा कि -"महिंद्रा जी को रात में काले नाग ने डस लिया जिससे उनकी मृत्यु हो गयी |
नौकर के मुंह से इतना सुनते ही मूमल पछाड़ खाकर धरती पर गिर पड़ी और पड़ते ही महिंद्रा के वियोग में उसके प्राण पखेरू उड़ गए |
महेन्द्रा को जब मूमल की मृत्यु का समाचार मिला तो वह सुनकर उसी वक्त पागल हो गया और सारी उम्र " हाय म्हारी प्यारी मूमल,म्हारी प्यारी मूमल" कहता फिरता रहा |